मुझे इश्क़ के बारे में हमेशा से लगता था की इश्क़ ना फुरसत से होता है ,
चेहरे से नहीं लेकिन किसी की फ़ितरत से होता है ।
हर बार आँखो देखा नहीं पर कभी कभी तुम्हारी किस्मत में होता है ।
जब होता है तब सबकी रफ़्तार धीमी पड़ जाती है बस तुम्हारी धड़कन तेज होती है ।
जब तुम महसूस करोगे तो वो इंसान तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा अपना लगने लगता है ।
जब देखोगे तुम उनकी आँखों में तब सिर्फ़ तुम उन्ही की आँखो में देखने लगोगे ।
कभी उनकी बाहो में तुम्हें घर मिलेगा ।कभी उनके होने से तुम्हें सुकून ।
तुम बोलोगी की मैं ऐसा कैसे बता पा रहा हूँ ……🤔
अरे मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है ।
मैं भी ये सब महसूस कर चुका हूँ ।
मुझे भी ऐसा वाला इश्क़ हुआ था ।
जानती हो कब ??????
जब मैं पहली बार तुमसे मिला था ।
एक कॉफ़ी शॉप में चाय के बहाने ।
मुझे उस समय पहली बार देखकर तुम मुस्कुरायी थी मुझे याद है ,
लेकिन मैं तुम्हारी आँखो में आँखे डाल कर देख भी नहीं पाया था ।
क्युकी उस वक्त मुझे मालूम भी नहीं था की इश्क़ का एहसास ऐसा भी होता है ।
लेकिन तुम्हें जान कर एक बात समझ आया की इश्क़ ना करना पड़ता है ही नहीं , इश्क़ तो तब करना पड़ता है जब आग दोनों तरफ़ ना लगी हो और बस एक को पाने की ज़िद हो ।
पर हमारे केस में कुछ उल्टा ही था ।
इसलिए तुमसे इश्क़ करना ही नहीं पड़ा इश्क़ ना अपने आप हो गया ।
पर उस समय तुम भी ना फुर्सत से आए थे । ऐसा लगा की जानने की फ़ितरत से आए थे ।
बैंक के बाद मेरे इंतज़ार में समय निकालते थे तुम , तो लगा की रुकने की नियत से आए थे तुम ।
हर बार तुम्हें अपने लिए समय निकालते हुए ऐसे देख मेरे दिल की धड़कन तेज हो जाया करती थी । इतनी तेज की मेरे दिल के धड़कन की आवाज़ मैं सुन सकता था ।
अरे हा तुम्हारे आँखो में देख कर हर दिन मुझे ख़ुद से मोहब्बत हो जाया करता था । अरे याद ही होगा जिस दिन तुम्हारी आँखों में ना देख पाता तो अगले दिन समय निकाल के दिन ढलने के बाद ही सही हम मिल लिया करते । भले मुलाक़ात चंद लम्हों की हो पर एक दूसरे को सुन लिया करते । तुमसे इश्क़ किया , लेकिन तुमसे मिलने के बाद समझ आया की शायद किस्मत में था हमारा मिलना , क़िस्मत में था हमारा साथ होना । सब तो ठीक ही था ना ।
जरा एक बार पीछे जाना और याद करना बीते लम्हों को ।
क्युकी आज जो हो रहा वो शायद किस्मत में नहीं होना था।
यू तुमसे एक एक दिन दूर होना …..
शायद इसके लिए नहीं आया था भाग कर तुम्हारे पास मैं ।
चीजे बदलती है सबके साथ वक्त सबका एक जैसा नहीं रहता है ।
पर इंसान का बिहेवियर बता देता है की वो इस बदलते हुए वक्त में क्या रखना चाहता है और क्या फेकना ।
बस एक बात याद करना कि आख़िरी बार कब तुमने चाहा वो आँखो में आँखे डाल के बस यू ही देखना???
क्या तुम्हारी रुकने की नियत ख़त्म हो गई ?????
या अब ये इश्क़ मुकम्मल हो गया ????
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