मुझे इश्क़ के बारे में हमेशा से लगता था की इश्क़ ना फुरसत से होता है , चेहरे से नहीं लेकिन किसी की फ़ितरत से होता है । हर बार आँखो देखा नहीं पर कभी कभी तुम्हारी किस्मत में होता है । जब होता है तब सबकी रफ़्तार धीमी पड़ जाती है बस तुम्हारी धड़कन तेज होती है । जब तुम महसूस करोगे तो वो इंसान तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा अपना लगने लगता है । जब देखोगे तुम उनकी आँखों में तब सिर्फ़ तुम उन्ही की आँखो में देखने लगोगे । कभी उनकी बाहो में तुम्हें घर मिलेगा ।कभी उनके होने से तुम्हें सुकून । तुम बोलोगी की मैं ऐसा कैसे बता पा रहा हूँ ……🤔 अरे मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है । मैं भी ये सब महसूस कर चुका हूँ । मुझे भी ऐसा वाला इश्क़ हुआ था । जानती हो कब ?????? जब मैं पहली बार तुमसे मिला था । एक कॉफ़ी शॉप में चाय के बहाने । मुझे उस समय पहली बार देखकर तुम मुस्कुरायी थी मुझे याद है , लेकिन मैं तुम्हारी आँखो में आँखे डाल कर देख भी नहीं पाया था । क्युकी उस वक्त मुझे मालूम भी नहीं था की इश्क़ का एहसास ऐसा भी होता है । लेकिन तुम्हें जान कर एक बात समझ आया की इश्क़ ना करना पड़ता है ही नहीं , इश्क़ तो तब करना पड़ता ह...