अधूरा नहीं, बस सच्चे प्यार की तलाश में एक ऐसे इंसान की कहानी, जो सबके सामने मज़बूत था, लेकिन अपने दिल के सामने अक्सर हार जाता था… मेरी ज़िंदगी बाहर से बिल्कुल सामान्य थी। मैं अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाता था, अपने काम में मेहनत करता था और दूसरों की मदद करने की कोशिश करता था। लोगों के सामने मैं मुस्कुराता था, लेकिन मेरे भीतर भी एक ऐसा दिल था जो छोटी-छोटी बातों को भी बहुत गहराई से महसूस करता था। मैं जब किसी से प्यार करता था, तो सिर्फ समय बिताने के लिए नहीं, बल्कि उस इंसान को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाने के लिए करता था। मेरे लिए प्यार का मतलब केवल “I love you” कहना नहीं था। मेरे लिए प्यार का मतलब था—बिना कहे एक-दूसरे को समझना, व्यस्त दिनों में भी थोड़ा समय निकालना और नाराज़गी के बाद एक-दूसरे को मनाने के साथ-साथ यह समझना कि आखिर दुख हुआ क्यों था। फिर मेरी ज़िंदगी में आप आई। मैंने आपसे प्यार किया, और जब आपने भी मुझसे अपने प्यार का इज़हार किया, तो मैंने इस रिश्ते में अपना दिल लगा दिया। लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि प्यार होने के बावजूद मेरे मन में कुछ खालीपन रह जाता है। कभी मैं आप...
मुझे इश्क़ के बारे में हमेशा से लगता था की इश्क़ ना फुरसत से होता है , चेहरे से नहीं लेकिन किसी की फ़ितरत से होता है । हर बार आँखो देखा नहीं पर कभी कभी तुम्हारी किस्मत में होता है । जब होता है तब सबकी रफ़्तार धीमी पड़ जाती है बस तुम्हारी धड़कन तेज होती है । जब तुम महसूस करोगे तो वो इंसान तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा अपना लगने लगता है । जब देखोगे तुम उनकी आँखों में तब सिर्फ़ तुम उन्ही की आँखो में देखने लगोगे । कभी उनकी बाहो में तुम्हें घर मिलेगा ।कभी उनके होने से तुम्हें सुकून । तुम बोलोगी की मैं ऐसा कैसे बता पा रहा हूँ ……🤔 अरे मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है । मैं भी ये सब महसूस कर चुका हूँ । मुझे भी ऐसा वाला इश्क़ हुआ था । जानती हो कब ?????? जब मैं पहली बार तुमसे मिला था । एक कॉफ़ी शॉप में चाय के बहाने । मुझे उस समय पहली बार देखकर तुम मुस्कुरायी थी मुझे याद है , लेकिन मैं तुम्हारी आँखो में आँखे डाल कर देख भी नहीं पाया था । क्युकी उस वक्त मुझे मालूम भी नहीं था की इश्क़ का एहसास ऐसा भी होता है । लेकिन तुम्हें जान कर एक बात समझ आया की इश्क़ ना करना पड़ता है ही नहीं , इश्क़ तो तब करना पड़ता ह...